Hanuman Chalisa
श्री गुरु चरन सरोज रज,निज मनु मुकुर सुधारि। बरनउं रघुबर विमल जसु,जो दायकु फल चारि॥
श्री गुरु चरन सरोज रज,निज मनु मुकुर सुधारि। बरनउं रघुबर विमल जसु,जो दायकु फल चारि॥
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
जय गणपति सदगुण सदन,कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण,जय जय गिरिजालाल॥
जनक जननि पद कमल रज निज मस्तक पर धारि । बन्दौं मातु सरस्वती बुद्धि बल दे दातारि ॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास । मनो कामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस ॥
विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय । कीरत कुछ वर्णन करूँ दीजै ज्ञान बताय ॥
श्री रघुबीर भक्त हितकारी।सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बा फल,पिताम्बर शुभ साज॥
ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचण्ड । शान्ति कान्ति जागृत प्रगति रचना शक्ति अखण्ड ॥
श्री शनिश्चर देवजी,सुनहु श्रवण मम् टेर। कोटि विघ्ननाशक प्रभो,करो न मम् हित बेर॥
कनक बदन कुण्डल मकर मुक्ता माला अङ्ग । पद्मासन स्थित ध्याइए शंख चक्र के सङ्ग ॥
जय काली जगदम्ब जय,हरनि ओघ अघ पुंज। वास करहु निज दास के,निशदिन हृदय निकुंज॥
जय गिरी तनये दक्षजे शम्भू प्रिये गुणखानि । गणपति जननी पार्वती अम्बे शक्ति भवानि ॥
विश्वेश्वर पदपदम की रज निज शीश लगाय । अन्नपूर्णे तव सुयश बरनौं कवि मतिलाय ॥
श्री राधे वृषभानुजा,भक्तनि प्राणाधार। वृन्दाविपिन विहारिणि,प्रणवौं बारंबार॥
श्री तुलसी महारानी करूं विनय सिरनाय । जो मम हो संकट विकट दीजै मात नशाय ॥
जय जय जय जग पावनी,जयति देवसरि गंग। जय शिव जटा निवासिनी,अनुपम तुंग तरंग॥
प्रियसंग क्रीड़ा करत नित सुखनिधि वेद को सार । दरस परस ते पाप मिटे श्रीकृष्ण प्राण आधार ॥
मनु मय त्वष्टा विश्वकर्मा, शिल्प कर्म आधार । तीन लोक चौदह भुवन, करनी का विस्तार ॥
श्री गणपति गुरु गौरि पद प्रेम सहित धरि माथ । चालीसा वन्दन करौं श्री शिव भैरवनाथ ॥
जय जय माता शीतला तुमही धरे जो ध्यान । होय बिमल शीतल हृदय विकसे बुद्धी बल ज्ञान ॥
श्री जगन्नाथ जगत गुरू आस भगत के आप । नाम लेते ही आपका मिटे कष्ट संताप ॥
कोटि-कोटि मम वन्दना, कोटि-कोटि प्रणाम, आदि ब्रह्म पूर्ण पुरुष, श्री सत्गुरु सुख धाम।
जय जय श्री महालक्ष्मी,करूँ मात तव ध्यान। सिद्ध काज मम किजिये,निज शिशु सेवक जान॥
जय जय सीताराम के,मध्यवासिनी अम्ब। देहु दर्श जगदम्ब,अब करो न मातु विलम्ब॥
जय-जय मंगल मोर कृपा करो गुरु देव । संकट सब हर हरो करि मंगल सदा सेव ॥
नमो नमो जय श्री बुध राजा। करहुं कृपा मोहि जानि कायर अधम का॥
गाऊँ नित मंगलाचरण, गणपति मेरे नाथ। करो कृपा माँ शारदा, जीव रहें मेरे साथ॥
श्री गणपति गुरु गउ़रि, शंकर हनुमत कीन्ह। बिनवउं शुभ फल देन हरि, मुद मंगल दीन॥
जय-जय चंदा! श्री चन्द्रमा, जय-जय अमृत-अंशु-उजागर। जयति शशांक! कला-निधि, तुम हो नित्य सुधा-सागर॥
नमो नमो श्री राहु सुखकारी। सभी कष्टों को हरने वाले, भक्तों को सुख देने वाले॥
नमो नमो श्री केतु सुखकारी। कष्ट हरो संताप हमारे॥